Lt. General M.M Lakhera ----------------------
-------------- Lt. General Madan Mohan Lakhera better known as Lt. General M.M Lakhera is the ex-Governor of Mizoram state, India. Since 2006 he held that position. Earlier before that, M.M Lakhera served as the governor of the Union Territory of Puducherry, subsequently known as Pondicherry. During Feb 2006-Dec 2006, he also served as the Lt. Governor of the Andaman and Nicobar Islands.
Madan Mohan Lakhera was born on 21st October, 1937, at village Jakhand, Patti Barjula, district tehri Garhawal of Uttrakhand state to father late shri Jaya Nand Lakhera and mother Kalawati. He completed his schooling at primary school at Village Jakhand. Then after for higher studies, M.M Lakhera went to the prominent Rastriya Indian Military College, Dehradun. Later, he was taking training at the National Defense Academy, Khadakvasla, Pune. In the year of 1958, he was commissioned as officer in the Army from Indian Military Academy, Dehra Dun.
While the time he served in Indian Army, Lt. MM Lakhera take part in
the liberation of Goa in 1961 and the Indo-Pak wars of 1965 and 1971 in
the region of Jammu and Kashmir. He attended Senior Defense Management
course at the institute of Defense management of Secundrabad. During
1967-70, MM Lakhera served as Instructor at School of Artillery and then
after at the Army War college from the year 1978 to 1981. He possesses a
huge experience in managing counter insurgency operation.
From the year 1981 to 1982, he also served as the Deputy Commander of a Brigade in Manipur. While in 1984, the ‘Blue Star’ operation in Punjab, this formation participated and also offered effective assistance to the civil authority at Kanpur in the riots of 1984. Due to the successful handling these operations, MM Lakhera was awarded two times as Chief of army Staff Commendation Card on 15th January 1985 and 15th August 1985.
Awards: For eminent services of most outstanding order, Lt. MM Lakhera was awarded with ‘Param Vishisht Seva Medal’ by the President of India on 26 January 1995.
From the year 1981 to 1982, he also served as the Deputy Commander of a Brigade in Manipur. While in 1984, the ‘Blue Star’ operation in Punjab, this formation participated and also offered effective assistance to the civil authority at Kanpur in the riots of 1984. Due to the successful handling these operations, MM Lakhera was awarded two times as Chief of army Staff Commendation Card on 15th January 1985 and 15th August 1985.
Awards: For eminent services of most outstanding order, Lt. MM Lakhera was awarded with ‘Param Vishisht Seva Medal’ by the President of India on 26 January 1995.
मिजोरम के पूर्व राज्यपाल जनरल मदन मोहन लखेड़ा
*************** यह मेरे ( हरीश चंद्र लखेड़ा ) लिए बड़े शौभाग्य की बात रही है कि मुझे जनरल मदन मोहन लखेड़ा जी का स्नेह मिलता रहा है। जब वे कांग्रेस के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के चेयरमैन थे, उन दिनों मैं राष्ट्रीय सहारा में रहते हुए कांग्रेस की रिपोर्टिंग करता था। पहली ही भेंट में उनसे ऐसी निकटता हो गई कि आज तक कायम है।
बाद में वे पुडुचेरी के उप राज्यपाल व फिर मिजोरम के राज्यपाल बने। मैं दोनों ही जगह उनसे पास गया। आमतौर फोजी अफसरों को बहुत रौबदार माना जाता है, लेकिन जनरल साहब को देखकर लगता ही नहीं । वे बहुत विनम्र है। टिहरी गढ़वाल के जखंड में जन्में जनरल साहब अब गुडग़ांव में रहते हैं।
जनरल लखेड़ा ने पूर्वोत्तर के सीमांत प्रदेश मिजोरम के राज्यपाल के तौर पर सफल पारी खेली। इससे पहले पांडिचेरी के उप राज्यपाल के तौर पर भी उन्होंने सुनामी पीडि़तों के पुनर्वास के लिए उल्लेखनीय कार्य किये। जनरल लखेड़ा ने कुछ समय तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उप राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला। मधुर स्वभाव और अपनी लगन के पक्के जनरल लखेड़ा उत्तराखंड के एक मात्र ऐसे फौजी अफसर हैं जो, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम समेत सभी मेडलों से सम्मानित किये गये। वे दो बार चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेन्डेशन रहे जिनकी सराहनीय सेवा के लिए इतने मेडलों से पुरस्कृत किया गया। सन् 1995 में सेवा से निवृत्त होने के बाद जन-साधारण के कल्याणकारी कार्यों में खासकर, पूर्व-सैनिकों के कल्याण के लिए समर्पित सेवा की। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी, एक्स सर्विसमैन सेल के अध्यक्ष भी रहे। 7 जुलाई 2004 को उन्होंने पांडिचेरी के उप-राज्यपाल तथा प्रशासक का कार्यभार संभाला। लगभग ढाई साल के बाद उन्हें मिजोरम का राज्यपाल बनाया गया। वे उत्तराखंड के गढ़वाल डिवीजन के अकेले मनीषी हैं, जो राज्यपाल बने। जनरल लखेड़ा का का जन्म दिनांक 21 अक्टूबर 1937 को जनपद टेहरी गढ़वाल के पट्टी बरजुला के जखंड गांव में हुआ था। उनके पिता स्व. जयनंद लखेड़ा, टिहरी गढ़वाल के शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी व्यक्तियों में से एक थे। आपकी मां स्व. कलावती जी, एक आदर्श गृहिणी थीं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जाखंड प्राथमिक विद्यालय में हुई थी। उच्च शिक्षा राष्ट्रीय इंडियन मिलिटरी कॉलेज (फकटउ), देहरादून (1949 से 1951 तक) से ली। तत्पश्चात, नेशनल डिफेंस अकादमी, खडक़वासला, पुणे से प्रशिक्षण लिया और दिनांक 08 जून 1958 से इंडियन मिलिटरी कॉलेज, देहरादून से प्रशिक्षण लेकर भारतीय सेना में कमीशंड ऑफिसर बने। सन् 1961 में गोवा ऑपरेशन, 1965 व 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में जम्मू-कश्मीर सेक्टर में आपने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दक्षिण भारत के वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टॉफ कॉलेज से और स्कूल ऑफ आर्टिल्लरी में लॉग गन्नरी स्टॉफ कोर्स में प्रशिक्षण प्राप्त किया। सन् 1967 से 1970 तक स्कूल ऑफ आर्टिल्लरी में और तत्पश्चात, 1978 से 1981 तक कॉलेज ऑफ कोम्बाट, मऊ में अनुदेशक के पद को सुशोभित किया। दिसम्बर 1975 से जुलाई 1978 तक जम्मू-कश्मीर में कुमाऊं रेजीमेंट के चतुर्थ बटालियन का सुचारू रूप से संचालन किया। काउंटर इंसरजैंसी ऑपरेशन के आप विशेषज्ञ माने जाते हैं। सन् 1981 से 1982 तक मणिपुर ब्रिगेड के डिप्टी कमांडर रहे। ब्रिगेडियर के पद से पदोन्नति पाकर आप कानपुर ब्रिगेड के कमांडर बने। पंजाब में 1984 में हुए ‘ब्लू स्टॉर ऑपरेशन’ तथा 1984 में कानपुर में हुए दंगों पर नागरिक प्रशासकों को सहायता देने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आप इन महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए 15 जनवरी 1985 और 15 अगस्त 1985 (दो बार) चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेन्डेशन कार्ड से पुरस्कृत किए गए। तत्पचात उन्हें कश्मीर घाटी के सब एरिया कमांडर के पद पर नियुक्त किया गया। वहां सेनाओं को अग्रसारित करने में लॉजिस्टिक सपोर्ट के अलावा नागरिक प्रशासकों की सहायता दिलाई। संवेदनशील कश्मीर घाटी में चौतरफा व विकट समस्याओं को हल करने में उनकी समर्पित, संवेदनशीलपूर्ण,व प्रोफेशनल क्षमता एवं निष्ठापूर्ण सेवाओं के लिए राष्ट्रपिता ने 26 जनवरी 1991 में ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ से अलंकृत किया गया। उन्होंने सिकंदराबाद स्थित इन्फेटरी डिवीजन को कमांड भी किया। सितंबर 1992 में ले. जनरल की पदोन्नति मिली और सेंट्रल कमांड हेडक्वार्टर्स में चीफ ऑफ स्टाफ के पद पर नियुक्त किए गए। जून 1993 में भारतीय थल सेना के एडजुटेन्ट जनरल बने। सेना के मानव संसाधन व सेवा शर्तों और डिफेंस सिविलियनों की जनशक्ति आयोजना तथा प्रबंधन कार्यों की नीति तैयार करने में बड़ा योगदान रहा। कुमाऊं रेजिमेंट के कर्नल कमांटेंट भी रहे। आपकी विशिष्ट परम सेवाओं के लिए राष्ट्रपति ने 26 जनवरी 1995 ‘परम विशिष्ट सेवा मेडल’ से विभूषित किए गए। इसके बाद कांग्रेस से जुड़े और फिर राज्यपाल के पद तक पहुंचे। जनरल लखेड़ा को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निकटतम लोगों में गिना जाता है। उनके बड़े भाई भूदेव लखेड़ा कांग्रेस के प्रसिद्ध नेता थे।





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